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हमारी सोच की आग से खुद को बचा पाना तेरी ताकत से बाहर है

तेरी अकड़ को तो हम चाय में डुबोकर पी जाएं,

कमेंट में जरूर बताएं कि आपको कौन-सी शायरी सबसे ज्यादा पसंद आई और क्यों।

ये लड़कियाँ खुले आसमान सी सच्ची होती हैं।

क्योंकि हम वहां वार करते हैं जहां कोई सोच भी नहीं पाता।

क्योंकि अब मैं नए अंदाज में मिलने वाला हु…!

शेर पिंजरे में बंद हो तो जोकर कहलाता है

और तुम्हें लगता है मैं तुम्हारी सुनूंगा…!

जिगर वाले का डर से कोई वास्ता नहीं होता

पर तू अभी बच्चा है बचा के रख अपनी जवानी..!!

क्या बदमाशी शायरी में badmashi shayari सख्त भाषा का इस्तेमाल करना जरूरी है?

लायक नहीं हु में नालायक हु में तेरे जैसे भड़वे के लिए खलनायक हु में !!

क्योंकि जो मैं था वो मैं रहा नहीं, और जो मैं हूँ, वो तुम्हें पता नहीं…!

जो खेल हम खेलते हैं, वो कोई और कहां पाता है।

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